रिश्वत मामले में जिला अदालत से लिपिक को मिली राहत

Aug 11, 2026

 जबलपुर,। जबलपुर जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर की अदालत ने रिश्वत के एम मामले में सुनवाई के बाद इस मत के साथ सेल्स टैक्स विभाग के सहायक ग्रेड-टू प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दोषमुक्त कर दिया कि घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने और रकम बरामद होने के बावजूद अभियोजन यदि यह साबित नहीं कर पाए कि आरोपित ने रिश्वत की मांग की थी, तो केवल रकम की बरामदगी के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।

मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि लोकायुक्त जबलपुर ने संभागीय उपायुक्त, वाणिज्य कर कार्यालय में पदस्थ श्रीवास्तव को दो हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा था। आरोप था कि उसने एसोसिएटेड इलेक्ट्रिकल एजेंसी, मुंबई के अधिकृत प्रतिनिधि सुरेश कुमार गुप्ता से सेल्स टैक्स निर्धारण संबंधी फाइल दिखाने और प्रस्तुत करने के एवज में रिश्वत मांगी थी।

बचाव पक्ष की अधिवक्ता नम्रता के. अग्रवाल ने न्यायालय में तर्क दिया कि कथित रिश्वत मांगने की रिकार्डिंग में आरोपित की आवाज होने का तथ्य प्रमाणित नहीं हुआ। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि शिकायतकर्ता और आरोपी पूर्व परिचित थे तथा दोनों के बीच पहले विवाद भी हो चुका था। यही नहीं जिस फाइल को दिखाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप था, उससे संबंधित अपीलीय आदेश पूर्व में ही संबंधित जर्नल में प्रकाशित हो चुका था।

उभय पक्षों को सुनने के बाद विशेष न्यायालय ने कहा कि पीसी एक्ट की धारा 20 के तहत उपधारणा के लिए आरोपित के कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद होना अकेले पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को असम्यक लाभ की मांग किए जाने का तथ्य भी प्रमाणित करना होगा। महज मुद्रा की बरामदगी से पीसी एक्ट की धारा-सात के तहत अपराध स्वतः गठित नहीं होता। इस मत के साथ पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने आरोपित को दोषमुक्त कर दिया।



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