नई दिल्ली। पूरे भारत में घरों के बजट पर लगातार दबाव बना हुआ है, क्योंकि अंडे, चिकन और दूध जैसे रोज़मर्रा के खाद्य पदार्थों की खुदरा कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और निकट भविष्य में इनमें कोई खास राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। हालांकि मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण अक्सर कीमतों में थोड़ी देर के लिए उछाल आता है, लेकिन कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी की मुख्य वजह पशुपालन और पोल्ट्री सेक्टर की गहरी और स्थायी संरचनात्मक समस्याएं हैं।
इस महंगाई के रुझान के केंद्र में पशुओं के चारे की लागत में भारी बढ़ोतरी है, जो किसानों के लिए कुल उत्पादन खर्च का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा होती है। पशु चारे के लिए ज़रूरी चीज़ें जैसे कार्बोहाइड्रेट के लिए मक्का और प्रोटीन के लिए सोयाबीन मील या तिलहन की खली आदि की कीमतों में पिछले एक साल में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसानों का मुनाफा घट गया है और उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ गया है। अल नीनो के कारण मौसम में गड़बड़ी, स्थानीय स्तर पर पानी की कमी और मक्का जैसी मुख्य फसलों की कम बुवाई के अनुमान जैसे कारकों ने कच्चे चारे वाले अनाज की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ मक्के के रकबे में 4.1प्रतिशत की गिरावट आई है और यूएसडीए के अनुमानों के मुताबिक भारत का मक्का उत्पादन भी कम हो सकता है, जिससे बाजार में इसकी उपलब्धता और प्रभावित होगी। इसके अलावा, इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीति ने भी मक्के की आपूर्ति को पशु चारे से हटाकर दूसरी तरफ मोड़ दिया है, जिससे चारे के लिए मक्के की उपलब्धता कम हो गई है और लागत का दबाव और बढ़ गया है। मक्का, जो ब्रॉयलर चारे का 55-65 प्रतिशत और अंडा देने वाली मुर्गियों के चारे का 50-60 प्रतिशत हिस्सा होता है, उसकी ऊंची कीमतें सीधे तौर पर इन उत्पादों को महंगा कर रही हैं। प्रोटीन के महंगे स्रोत जैसे सोयाबीन मील, मूंगफली की खली और रेपसीड ऑयलकेक की कीमतें भी बढ़ी हैं, जिससे किसानों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है और वे अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हैं।
कच्चे चारे के अलावा अन्य बड़े ऑपरेशनल चैलेंज भी हैं; जैसे गर्मी के तनाव के कारण पशुओं और पक्षियों की मौत से आपूर्ति में गिरावट, ऊर्जा और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी, और छोटे किसानों का घटता मुनाफा। पोल्ट्री और लेयर फार्मिंग में कुल उत्पादन लागत का लगभग 65-70 प्रतिशत हिस्सा चारे का होता है, ऐसे में चारे की लागत ऊंची रहने पर खुदरा कीमतों में कमी की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है। पशुपालन क्षेत्र का महत्व भी बढ़ा है, 2023-24 में इसका ग्रॉस वैल्यू एडेड फसल मूल्य का 57 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो कृषि अर्थव्यवस्था में इसकी बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शाता है।
नतीजतन, धार्मिक या त्योहारों के समय (जैसे सावन या नवरात्रि) अंडों की मांग में अस्थायी कमी के बावजूद, संरचनात्मक इनपुट लागत के कारण आने वाले महीनों में पोल्ट्री और डेयरी उत्पादों की ऊंची कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ सकता है। चारे की ज़्यादा लागत की वजह से ब्रॉयलर के उत्पादन की लागत लगभग रु.110 प्रति किलोग्राम और लेयर फ़ीड की लागत रु.30–32 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जिससे किसानों का मुनाफा काफी घट गया है और फार्मगेट कीमतों में भी गिरावट नहीं आ पा रही है। कुल मिलाकर, इन सभी संरचनात्मक समस्याओं और बढ़ते इनपुट लागतों के कारण, उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में भी पोल्ट्री और डेयरी उत्पादों की ऊंची कीमतों का बोझ उठाना पड़ सकता है, भले ही मौसमी मांग में अस्थायी कमी आए।
उत्तर प्रदेश मे महोबा जिले के चरखारी क्षेत्र मे रविवार को अनुसूचित वर्ग के तीन मासूम बच्चों की बरसाती पानी से भरे पोखर नुमा गड्ढे मे डूब कर मौत हो गयी. पुलिस ने बच्चो के शव देर रात बरामद किये.
पुलिस उप अधीक्षक दीपक दुबे ने बताया की रिवई गाँव में स्थित राजकीय मांडल स्कूल के मैदान मे शाम के समय आसपास के कुछ बच्चे रोजमर्रा की तरह खेल रहे थे.तभी तीन बच्चे वहाँ बरसाती पानी से भरे एक गडडा नुमा पोखर में उतर गए ओर पानी मे डूब गए. अंधेरा गहराने पर घर न पहुंचने पर परिजनों ने ज़ब बच्चो की तलाश की तो पोखर मे उतराते हुए बच्चो के शव देख ह्ड़कंप मच गया.सूचना पाकर पुलिस ने तत्काल मोके पर पहुंच बच्चो के शवो को बाहर निकाला ओर पंचनामा भर कर पोस्ट मार्टम के लिए पहुंचाया है.
पुलिस उप अधीक्षक ने बताया की अनुसूचित वर्ग के अत्यंत निर्धन परिवार के मृतक बच्चो मे प्रिंस पुत्र मनोज उम्र 11बर्ष, प्रिंस की चचेरी बहिन रोशनी पुत्री जियालाल उम्र 9 वर्ष तथा अंशुल पुत्र खलक सिंह 6बर्ष शामिल है.एक परिजन दिलीप ने बताया की मृत बच्चे गाँव मे अपने दादा दादी के पास रह रहे थे. उनके माता पिता मजदूरी के लिए दिल्ली गए हुए है.घटना की सूचना पाकर तहसीलदार आर एन मिश्रा नायाब तहसीलदार विकास गोयल कानूनगो प्रदीप खरे लेखपाल मनीष कुमार भी मौके पर पहुंचे है तथा पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता हेतु कार्यवाही की है. पुलिस घटना की जांच पड़ताल कर रही है.
नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र में वाणिज्यिक सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी अवलोकन, छोटे उपग्रह निर्माण और जैव-प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों में भागीदारी करना है। ऑस्ट्रेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगले सप्ताह बेंगलुरु स्पेस एक्सपो में भारतीय कंपनियों के साथ तीन से पांच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
ऑस्ट्रेड के व्यापार एवं निवेश आयुक्त नाथन डेविस ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया पृथ्वी अवलोकन, छोटे उपग्रहों के निर्माण व प्रक्षेपण सेवाओं, ट्रैकिंग और जैव-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के साथ मिलकर काम करना चाहता है। विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स में माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान भी एक संभावित क्षेत्र है। अगले सप्ताह बेंगलुरु स्पेस एक्सपो में ऑस्ट्रेलिया प्रौद्योगिकी देश भागीदार के रूप में भाग लेगा, जिसमें नौ कंपनियों और तीन विश्वविद्यालयों सहित 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा।
सिडनी स्थित स्पेस मशीन्स और लैटकनेक्ट 60 जैसी कंपनियां पहले ही भारतीय स्टार्टअप के साथ साझेदारी कर चुकी हैं, जबकि रिसर्चसैट जैसी कंपनियां भारत में भागीदार तलाश रही हैं। ऑस्ट्रेलिया का अंतरिक्ष क्षेत्र वर्तमान में $4.6 अरब का वार्षिक टर्नओवर और 17,000 रोजगार प्रदान करता है, जिसका लक्ष्य इसे कुछ वर्षों में $12-13 अरब तक बढ़ाना है।
दोनों देश भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के लिए पहले से ही सहयोग कर रहे हैं, जिसमें ऑस्ट्रेलिया टेलीमेट्री ट्रैकिंग और क्रू-मॉड्यूल रिकवरी क्षमताओं में योगदान दे रहा है। भारतीय कंपनियां ऑस्ट्रेलिया की प्रक्षेपण सुविधाओं का उपयोग कर सकती हैं, जबकि ऑस्ट्रेलियाई कंपनियां भारत के बढ़ते प्रक्षेपण पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ उठा सकती हैं।
नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच क्रिकेट इतिहास का एक नया अध्याय लिखे जाने जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार, 4 सितंबर को जापान के खिलाफ होने वाले ऐतिहासिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के कार्यक्रम की घोषणा की। दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें 22 सितंबर 2026 को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में आमने-सामने होंगी।
यह मुकाबला भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के समारोह की शुरुआत के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। बीसीसीआई और जापान क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को खेल के माध्यम से और मजबूत करने के उद्देश्य से यह विशेष टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित किया जा रहा है।
भारत और जापान के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी प्रारूप में यह पहला क्रिकेट मुकाबला होगा। एक ओर विश्व क्रिकेट की मजबूत टीमों में शामिल भारतीय टीम होगी, जबकि दूसरी ओर जापान की टीम अपने क्रिकेट सफर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की कोशिश करेगी। यह मुकाबला ‘स्पोर्ट 75’ पहल का पहला कदम भी बताया गया है।
इस पहल का उद्देश्य खेल के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच आपसी सहयोग और खिलाड़ियों तथा लोगों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह पहल दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई सहमति के बाद शुरू की गई है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने इस अवसर को क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम का जापान में खेलना खेल के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे जापान और पूर्वी एशिया में क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। 22 सितंबर को होने वाला यह मुकाबला केवल एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच खेल, संस्कृति और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच क्रिकेट इतिहास का एक नया अध्याय लिखे जाने जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार, 4 सितंबर को जापान के खिलाफ होने वाले ऐतिहासिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के कार्यक्रम की घोषणा की। दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें 22 सितंबर 2026 को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में आमने-सामने होंगी।
यह मुकाबला भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के समारोह की शुरुआत के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। बीसीसीआई और जापान क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को खेल के माध्यम से और मजबूत करने के उद्देश्य से यह विशेष टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित किया जा रहा है।
भारत और जापान के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी प्रारूप में यह पहला क्रिकेट मुकाबला होगा। एक ओर विश्व क्रिकेट की मजबूत टीमों में शामिल भारतीय टीम होगी, जबकि दूसरी ओर जापान की टीम अपने क्रिकेट सफर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की कोशिश करेगी। यह मुकाबला ‘स्पोर्ट 75’ पहल का पहला कदम भी बताया गया है।
इस पहल का उद्देश्य खेल के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच आपसी सहयोग और खिलाड़ियों तथा लोगों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह पहल दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई सहमति के बाद शुरू की गई है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने इस अवसर को क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम का जापान में खेलना खेल के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे जापान और पूर्वी एशिया में क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। 22 सितंबर को होने वाला यह मुकाबला केवल एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच खेल, संस्कृति और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच क्रिकेट इतिहास का एक नया अध्याय लिखे जाने जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार, 4 सितंबर को जापान के खिलाफ होने वाले ऐतिहासिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के कार्यक्रम की घोषणा की। दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें 22 सितंबर 2026 को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में आमने-सामने होंगी।
यह मुकाबला भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के समारोह की शुरुआत के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। बीसीसीआई और जापान क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को खेल के माध्यम से और मजबूत करने के उद्देश्य से यह विशेष टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित किया जा रहा है।
भारत और जापान के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी प्रारूप में यह पहला क्रिकेट मुकाबला होगा। एक ओर विश्व क्रिकेट की मजबूत टीमों में शामिल भारतीय टीम होगी, जबकि दूसरी ओर जापान की टीम अपने क्रिकेट सफर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की कोशिश करेगी। यह मुकाबला ‘स्पोर्ट 75’ पहल का पहला कदम भी बताया गया है।
इस पहल का उद्देश्य खेल के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच आपसी सहयोग और खिलाड़ियों तथा लोगों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह पहल दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई सहमति के बाद शुरू की गई है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने इस अवसर को क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम का जापान में खेलना खेल के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे जापान और पूर्वी एशिया में क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। 22 सितंबर को होने वाला यह मुकाबला केवल एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच खेल, संस्कृति और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच क्रिकेट इतिहास का एक नया अध्याय लिखे जाने जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार, 4 सितंबर को जापान के खिलाफ होने वाले ऐतिहासिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के कार्यक्रम की घोषणा की। दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें 22 सितंबर 2026 को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में आमने-सामने होंगी।
यह मुकाबला भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के समारोह की शुरुआत के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। बीसीसीआई और जापान क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को खेल के माध्यम से और मजबूत करने के उद्देश्य से यह विशेष टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित किया जा रहा है।
भारत और जापान के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी प्रारूप में यह पहला क्रिकेट मुकाबला होगा। एक ओर विश्व क्रिकेट की मजबूत टीमों में शामिल भारतीय टीम होगी, जबकि दूसरी ओर जापान की टीम अपने क्रिकेट सफर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की कोशिश करेगी। यह मुकाबला ‘स्पोर्ट 75’ पहल का पहला कदम भी बताया गया है।
इस पहल का उद्देश्य खेल के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच आपसी सहयोग और खिलाड़ियों तथा लोगों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह पहल दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई सहमति के बाद शुरू की गई है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने इस अवसर को क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम का जापान में खेलना खेल के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे जापान और पूर्वी एशिया में क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। 22 सितंबर को होने वाला यह मुकाबला केवल एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच खेल, संस्कृति और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच क्रिकेट इतिहास का एक नया अध्याय लिखे जाने जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार, 4 सितंबर को जापान के खिलाफ होने वाले ऐतिहासिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के कार्यक्रम की घोषणा की। दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें 22 सितंबर 2026 को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में आमने-सामने होंगी।
यह मुकाबला भारत और जापान के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के समारोह की शुरुआत के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। बीसीसीआई और जापान क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को खेल के माध्यम से और मजबूत करने के उद्देश्य से यह विशेष टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित किया जा रहा है।
भारत और जापान के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी प्रारूप में यह पहला क्रिकेट मुकाबला होगा। एक ओर विश्व क्रिकेट की मजबूत टीमों में शामिल भारतीय टीम होगी, जबकि दूसरी ओर जापान की टीम अपने क्रिकेट सफर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की कोशिश करेगी। यह मुकाबला ‘स्पोर्ट 75’ पहल का पहला कदम भी बताया गया है।
इस पहल का उद्देश्य खेल के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच आपसी सहयोग और खिलाड़ियों तथा लोगों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह पहल दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई सहमति के बाद शुरू की गई है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने इस अवसर को क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम का जापान में खेलना खेल के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे जापान और पूर्वी एशिया में क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। 22 सितंबर को होने वाला यह मुकाबला केवल एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच खेल, संस्कृति और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।