सपाट पिच के आलोचकों को उसकी बल्लेबाजी से मिला जवाब
नई दिल्ली । पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने भारतीय टी20 टीम के आक्रामक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा है कि वह किसी भी प्रकार के हालातों में खेल सकता है। कैफ ने कहा कि जिस प्रकार से अभिषेक ने हाल के दिनों में खेला है उससे उनकी आलोचना करने वालों को जवाब मिल गया है।
कैफ ने कहा कि जो लोग अभिषेक को सपाट पिच का खिलाड़ी कहते थे अब उन्हें ये अवसर नहीं मिलेगा। जिस प्रकार से उसने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों उन्हीं की धरती पर पीटा है। उससे साबित हुआ है कि वह किसी भी प्रकार की पिच पर खेल सकता है। कैफ का मानना है कि अभिषेक ने पिछले एक महीने के भीतर यह साबित कर दिया है कि वह कठिन और अलग-अलग हालातों में भी बड़ी व प्रभावशाली पारियां खेलने में सक्षम हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ उनकी 35 गेंदों में शतक और 15 गेंदों में अर्धशतक की पारी इसका उदाहरण है, खासकर तब जब न्यूजीलैंड की परिस्थितियाँ बल्लेबाजी के अनुकूल नहीं मानी जातीं।
कैफ ने साफ शब्दों में कहा, सबसे पहले, लोग यह कहना बंद कर दें कि अभिषेक शर्मा फ्लैट ट्रैक का खिलाड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वास्तविकता इससे कोसों दूर है। कैफ ने बीते एक महीने में अभिषेक द्वारा खेली गई दो महत्वपूर्ण पारियों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, जापान में हुए एशियाई खेल के फाइनल में आपको याद होगा, उन्होंने मुश्किल पिच पर रन बनाए थे। वहां स्पिनर हावी थे और उन्हें पिच से मदद मिल रही थी, फिर भी अभिषेक ने एक मैच विजेता पारी खेली थी।
वहीं न्यूजीलैंड की परिस्थितियों पर बात करते हुए कैफ ने आलोचकों को घेरा, अब आ जाओ न्यूजीलैंड पर तो यहां भी लोग बात करते हैं कि यहां बैटिंग कंडीशन्स हैं। अरे भाई यहां बैटिंग कंडीशन नहीं हैं! उन्होंने बताया कि अभिषेक ने दो बिल्कुल अलग-अलग हालातों में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है, जो उनकी अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है। कैफ ने कहा, वह हालातों के अनुसार प्रभावी पारियां खेल सकते हैं।
मैं तो हरगिज यह मानने के लिए तैयार नहीं हूं। बल्लेबाज को श्रेय देने की बात पर कैफ ने कहा, इसका श्रेय बल्लेबाज को मिलना चाहिए। उसने इतनी मेहनत की है और इसका फल मिल रहा है तो इसकी चर्चा और इसकी तारीफ होनी चाहिए।कैफ ने अभिषेक को एक बहुमुखी प्रतिभा वाला बल्लेबाज बताया है जो किसी एक प्रकार के हालातों में प्रभावी प्रदर्शन कर सकता है।
धनतेरस पर निवेशक सोने-चांदी के गहनों के अलावा चुन सकते हैं अन्य विकल्प
-निवेश से पहले उससे जुड़े शुल्क, शुद्धता और शर्तों को अच्छी तरह समझ लें
नई दिल्ली,। धनतेरस पर सोने और चांदी की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इस दिन लोग गहने या सिक्के खरीदते हैं, लेकिन आधुनिक वित्तीय साधनों के जरिए इन कीमती धातुओं में निवेश करके बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सकता है। अपनी जरूरतों और वित्तीय लक्ष्यों के मुताबिक निवेशक गहनों के अलावा कई अन्य विकल्पों का चुनाव कर सकते हैं।
पहला विकल्प सोने-चांदी के गहने, सिक्के या छड़ें खरीदना है। यह पारंपरिक तरीका है, हालांकि गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज और करों का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। यदि शुद्ध निवेश के नजरिए से देखा जाए तो सिक्के या छड़ें खरीदना ज्यादा उपयुक्त रहता है।
दूसरा विकल्प गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ है। ये शेयर बाजार में खरीदे और बेचे जाने वाले फंड हैं, जो सोने-चांदी की वास्तविक कीमतों पर आधारित होते हैं। इसमें धातु को भौतिक रूप में घर पर रखने या चोरी होने का जोखिम नहीं रहता।
तीसरा विकल्प गोल्ड और सिल्वर म्युचुअल फंड है। जो निवेशक बिना डीमैट खाते के निवेश करना चाहते हैं, वे इन फंड्स के जरिए पैसा लगा सकते हैं। ये फंड मुख्य रूप से ईटीएफ में निवेश करते हैं। चौथा विकल्प डिजिटल गोल्ड है, जिसमें कई मोबाइल ऐप्स के जरिए बेहद कम रकम से भी ऑनलाइन सोना खरीदा जा सकता है।
सेबी या आरबीआई का प्रत्यक्ष नियंत्रण न होने के कारण डिजिटल गोल्ड में निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता अवश्य जांच लेनी चाहिए। पांचवां विकल्प इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट है। यह शेयर बाजार में मानकीकृत मात्रा में कारोबार करने वाला साधन है, जहां खरीदे गए सोने को सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है।
निवेशक जरुरत पड़ने पर इसे भौतिक सोने में भी बदल सकते हैं। जानकारों के मुताबिक निवेश का कोई भी तरीका चुनने से पहले उससे जुड़े शुल्कों, शुद्धता और तरलता की शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए ताकि त्योहार पर की गई खरीदारी वित्तीय रूप से भी लाभदायक सिद्ध हो सके।
होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई विक्रेताओं का बढ़ सकता है लागत खर्च
नई दिल्ली,। त्योहारी सीजन से ठीक पहले रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर आम जनता और व्यापारियों के बीच मिश्रित स्थिति देखने को मिल रही है। जहां घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं, वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतों के कारण होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई विक्रेताओं का लागत खर्च बढ़ सकता है।
घरेलू गैस सिलेंडर के स्थिर दामों ने आम परिवारों को राहत दी है। राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 939.50 रुपए पर स्थिर बनी हुई है। मुंबई में यह 941.50 रुपए, कोलकाता में 968 रुपए और पटना में 1,031.50 रुपए प्रति सिलेंडर मिल रहा है।
इसके विपरीत 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की ऊंची कीमतों ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की चिंताएं बढ़ा दी है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,810 रुपए दर्ज की गई है। कोलकाता में इसका दाम 2,954 रुपए और पटना में 3,100.50 रुपए तक पहुंच गया है। अक्टूबर माह की शुरुआत में कमर्शियल सिलेंडर के दामों में प्रति सिलेंडर 62.50 रुपए की वृद्धि की गई थी।
जानकारों के मुताबिक दीपावली पर मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की मांग अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे कमर्शियल एलपीजी की खपत में भी भारी इजाफा होता है। ऐसे में कमर्शियल सिलेंडर का महंगा होना कारोबारियों के मार्जिन पर असर डाल सकता है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ की कीमत केवल ईंधन के दाम पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसमें दूध, चीनी, श्रम और कच्चे माल की लागत भी शामिल होती है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वैश्विक बाजार के रुझानों और कच्चे तेल की कीमतों की समीक्षा के बाद हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी के नए दामों की घोषणा करती हैं।
-हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का किया दावा
काबुल,। डूरंड रेखा पर बुधवार को तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 13 पाकिस्तानी सैनिक और नागरिक मारा गया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भीषण झड़पें हुईं। इस हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का दावा किया है।
यह घटना पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और बिगाड़ सकती है। मिसाइल हमले के बाद सीमा पर टकराव और तेज हो गया। सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान की कई सीमा चौकियों को नुकसान पहुंचने के बाद पाकिस्तानी बलों ने अफगान तालिबान की गोलाबारी का जवाब दिया। ]
इसी दौरान तालिबान लड़ाकों ने उन सीमा चौकियों पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की जिन्हें वे पहले खो चुके थे। इस कोशिश ने संघर्ष को और भड़का दिया और अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भी लड़ाई फैल गई। जानकारी के मुताबिक इस टकराव में आम लोग भी प्रभावित हुए हैं, हालांकि हताहतों की संख्या और मृतकों की अलग-अलग पुष्टि नहीं दी गई है। यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब इस्लामाबाद और काबुल के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं और दोनों एक-दूसरे पर उग्रवादी गुटों को समर्थन देने के आरोप लगा रहे हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की शांति भंग करने और विरोधी गुटों की मदद करने का आरोप लगाया है। सीमा पर तनाव का असर दोनों देशों के कारोबार पर भी पड़ा है। प्रमुख सीमा चौकियां बंद होने से व्यापार और माल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। ]
पाकिस्तान-अफगानिस्तान ज्वाइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अफगान चैप्टर के उपाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस मोहम्मंद के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार और ट्रांजिट गतिविधियां प्रभावी रूप से रुक गई हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2026-27 में पिछले साल के मुकाबले कारोबार में 95 फीसदी गिरावट की खबर है। पाकिस्तान ने 12 अक्टूबर 2025 को जानलेवा झड़पों के बाद अफगानिस्तान के साथ मुख्य सीमा चौकियां बंद कर दी थीं।
इस्लामाबाद का आरोप है कि तालिबान प्रशासन अपनी जमीन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के लड़ाकों को पनाह देता है। पाक ने सीमा खोलने को इन गुटों के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। हालांकि, अगस्त में जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान अब भी टीटीपी को समर्थन दे रहा है।
-हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का किया दावा
काबुल,। डूरंड रेखा पर बुधवार को तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 13 पाकिस्तानी सैनिक और नागरिक मारा गया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भीषण झड़पें हुईं। इस हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का दावा किया है।
यह घटना पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और बिगाड़ सकती है। मिसाइल हमले के बाद सीमा पर टकराव और तेज हो गया। सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान की कई सीमा चौकियों को नुकसान पहुंचने के बाद पाकिस्तानी बलों ने अफगान तालिबान की गोलाबारी का जवाब दिया। ]
इसी दौरान तालिबान लड़ाकों ने उन सीमा चौकियों पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की जिन्हें वे पहले खो चुके थे। इस कोशिश ने संघर्ष को और भड़का दिया और अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भी लड़ाई फैल गई। जानकारी के मुताबिक इस टकराव में आम लोग भी प्रभावित हुए हैं, हालांकि हताहतों की संख्या और मृतकों की अलग-अलग पुष्टि नहीं दी गई है। यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब इस्लामाबाद और काबुल के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं और दोनों एक-दूसरे पर उग्रवादी गुटों को समर्थन देने के आरोप लगा रहे हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की शांति भंग करने और विरोधी गुटों की मदद करने का आरोप लगाया है। सीमा पर तनाव का असर दोनों देशों के कारोबार पर भी पड़ा है। प्रमुख सीमा चौकियां बंद होने से व्यापार और माल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। ]
पाकिस्तान-अफगानिस्तान ज्वाइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अफगान चैप्टर के उपाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस मोहम्मंद के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार और ट्रांजिट गतिविधियां प्रभावी रूप से रुक गई हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2026-27 में पिछले साल के मुकाबले कारोबार में 95 फीसदी गिरावट की खबर है। पाकिस्तान ने 12 अक्टूबर 2025 को जानलेवा झड़पों के बाद अफगानिस्तान के साथ मुख्य सीमा चौकियां बंद कर दी थीं।
इस्लामाबाद का आरोप है कि तालिबान प्रशासन अपनी जमीन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के लड़ाकों को पनाह देता है। पाक ने सीमा खोलने को इन गुटों के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। हालांकि, अगस्त में जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान अब भी टीटीपी को समर्थन दे रहा है।
-हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का किया दावा
काबुल,। डूरंड रेखा पर बुधवार को तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 13 पाकिस्तानी सैनिक और नागरिक मारा गया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भीषण झड़पें हुईं। इस हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का दावा किया है।
यह घटना पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और बिगाड़ सकती है। मिसाइल हमले के बाद सीमा पर टकराव और तेज हो गया। सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान की कई सीमा चौकियों को नुकसान पहुंचने के बाद पाकिस्तानी बलों ने अफगान तालिबान की गोलाबारी का जवाब दिया। ]
इसी दौरान तालिबान लड़ाकों ने उन सीमा चौकियों पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की जिन्हें वे पहले खो चुके थे। इस कोशिश ने संघर्ष को और भड़का दिया और अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भी लड़ाई फैल गई। जानकारी के मुताबिक इस टकराव में आम लोग भी प्रभावित हुए हैं, हालांकि हताहतों की संख्या और मृतकों की अलग-अलग पुष्टि नहीं दी गई है। यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब इस्लामाबाद और काबुल के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं और दोनों एक-दूसरे पर उग्रवादी गुटों को समर्थन देने के आरोप लगा रहे हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की शांति भंग करने और विरोधी गुटों की मदद करने का आरोप लगाया है। सीमा पर तनाव का असर दोनों देशों के कारोबार पर भी पड़ा है। प्रमुख सीमा चौकियां बंद होने से व्यापार और माल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। ]
पाकिस्तान-अफगानिस्तान ज्वाइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अफगान चैप्टर के उपाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस मोहम्मंद के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार और ट्रांजिट गतिविधियां प्रभावी रूप से रुक गई हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2026-27 में पिछले साल के मुकाबले कारोबार में 95 फीसदी गिरावट की खबर है। पाकिस्तान ने 12 अक्टूबर 2025 को जानलेवा झड़पों के बाद अफगानिस्तान के साथ मुख्य सीमा चौकियां बंद कर दी थीं।
इस्लामाबाद का आरोप है कि तालिबान प्रशासन अपनी जमीन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के लड़ाकों को पनाह देता है। पाक ने सीमा खोलने को इन गुटों के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। हालांकि, अगस्त में जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान अब भी टीटीपी को समर्थन दे रहा है।
-हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का किया दावा
काबुल,। डूरंड रेखा पर बुधवार को तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 13 पाकिस्तानी सैनिक और नागरिक मारा गया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भीषण झड़पें हुईं। इस हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का दावा किया है।
यह घटना पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और बिगाड़ सकती है। मिसाइल हमले के बाद सीमा पर टकराव और तेज हो गया। सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान की कई सीमा चौकियों को नुकसान पहुंचने के बाद पाकिस्तानी बलों ने अफगान तालिबान की गोलाबारी का जवाब दिया। ]
इसी दौरान तालिबान लड़ाकों ने उन सीमा चौकियों पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की जिन्हें वे पहले खो चुके थे। इस कोशिश ने संघर्ष को और भड़का दिया और अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भी लड़ाई फैल गई। जानकारी के मुताबिक इस टकराव में आम लोग भी प्रभावित हुए हैं, हालांकि हताहतों की संख्या और मृतकों की अलग-अलग पुष्टि नहीं दी गई है। यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब इस्लामाबाद और काबुल के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं और दोनों एक-दूसरे पर उग्रवादी गुटों को समर्थन देने के आरोप लगा रहे हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की शांति भंग करने और विरोधी गुटों की मदद करने का आरोप लगाया है। सीमा पर तनाव का असर दोनों देशों के कारोबार पर भी पड़ा है। प्रमुख सीमा चौकियां बंद होने से व्यापार और माल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। ]
पाकिस्तान-अफगानिस्तान ज्वाइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अफगान चैप्टर के उपाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस मोहम्मंद के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार और ट्रांजिट गतिविधियां प्रभावी रूप से रुक गई हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2026-27 में पिछले साल के मुकाबले कारोबार में 95 फीसदी गिरावट की खबर है। पाकिस्तान ने 12 अक्टूबर 2025 को जानलेवा झड़पों के बाद अफगानिस्तान के साथ मुख्य सीमा चौकियां बंद कर दी थीं।
इस्लामाबाद का आरोप है कि तालिबान प्रशासन अपनी जमीन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के लड़ाकों को पनाह देता है। पाक ने सीमा खोलने को इन गुटों के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। हालांकि, अगस्त में जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान अब भी टीटीपी को समर्थन दे रहा है।
-हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का किया दावा
काबुल,। डूरंड रेखा पर बुधवार को तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 13 पाकिस्तानी सैनिक और नागरिक मारा गया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक तालिबान ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भीषण झड़पें हुईं। इस हमले में कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों को भी नुकसान पहुंचने का दावा किया है।
यह घटना पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और बिगाड़ सकती है। मिसाइल हमले के बाद सीमा पर टकराव और तेज हो गया। सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान की कई सीमा चौकियों को नुकसान पहुंचने के बाद पाकिस्तानी बलों ने अफगान तालिबान की गोलाबारी का जवाब दिया। ]
इसी दौरान तालिबान लड़ाकों ने उन सीमा चौकियों पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की जिन्हें वे पहले खो चुके थे। इस कोशिश ने संघर्ष को और भड़का दिया और अंगूर अड्डा बाजार के आसपास भी लड़ाई फैल गई। जानकारी के मुताबिक इस टकराव में आम लोग भी प्रभावित हुए हैं, हालांकि हताहतों की संख्या और मृतकों की अलग-अलग पुष्टि नहीं दी गई है। यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब इस्लामाबाद और काबुल के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं और दोनों एक-दूसरे पर उग्रवादी गुटों को समर्थन देने के आरोप लगा रहे हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की शांति भंग करने और विरोधी गुटों की मदद करने का आरोप लगाया है। सीमा पर तनाव का असर दोनों देशों के कारोबार पर भी पड़ा है। प्रमुख सीमा चौकियां बंद होने से व्यापार और माल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। ]
पाकिस्तान-अफगानिस्तान ज्वाइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अफगान चैप्टर के उपाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस मोहम्मंद के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार और ट्रांजिट गतिविधियां प्रभावी रूप से रुक गई हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 2026-27 में पिछले साल के मुकाबले कारोबार में 95 फीसदी गिरावट की खबर है। पाकिस्तान ने 12 अक्टूबर 2025 को जानलेवा झड़पों के बाद अफगानिस्तान के साथ मुख्य सीमा चौकियां बंद कर दी थीं।
इस्लामाबाद का आरोप है कि तालिबान प्रशासन अपनी जमीन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के लड़ाकों को पनाह देता है। पाक ने सीमा खोलने को इन गुटों के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। हालांकि, अगस्त में जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान अब भी टीटीपी को समर्थन दे रहा है।