दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी नई गति
काठमांडु। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह 22 से 24 नवंबर 2026 के बीच तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत आ सकते हैं। प्रधानमंत्री बनने के करीब आठ महीने बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी, हालांकि इससे पहले वे सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका के न्यूयॉर्क गए थे जो एक बहुपक्षीय दौरा था।
परंपरा के अनुसार नेपाल के प्रधानमंत्री अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा के लिए भारत को प्राथमिकता देते आए हैं, ऐसे में बालेन शाह का यह आगामी दौरा दोनों पड़ोसी देशों के राजनयिक संबंधों और आपसी सहयोग को नई मजबूती प्रदान करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी प्रतिनिधिमंडल स्तर की उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने, बुनियादी ढांचे के बड़े प्रोजेक्ट्स, सीमा से जुड़े विभिन्न मुद्दों तथा बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण और आपदा प्रबंधन जैसे अहम विषयों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, नेपाली प्रधानमंत्री के भारत के कई अन्य वरिष्ठ मंत्रियों से भी मिलने का कार्यक्रम है। हालांकि अभी तक इस दौरे की आधिकारिक तारीखों का विधिवत ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
इस बहुप्रतीक्षित दौरे के दौरान भारत के सहयोग से चल रही कई प्रमुख परियोजनाओं के उद्घाटन या उनके निर्माण कार्य की शुरुआत होने की उम्मीद है। इनमें नेपाल के पनौती में भारत की सहायता से निर्मित नेपाल पुलिस अकादमी, उत्तर प्रदेश की सीमा के पास स्थित भैरहवा एकीकृत जांच चौकी और पश्चिमी नेपाल के दार्चुला जिले में बने पुलों का उद्घाटन शामिल हो सकता है। साथ ही, डोधारा चांदनी एकीकृत जांच चौकी, लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना और सिलीगुड़ी-झापा पेट्रोलियम पाइपलाइन के निर्माण का श्रीगणेश भी इस यात्रा के दौरान होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि बालेन शाह के इस पहले द्विपक्षीय दौरे से पहले उनकी सरकार के कई प्रमुख मंत्री भारत का दौरा कर जमीन तैयार कर चुके हैं। इस वर्ष जून में नेपाल के विदेश मंत्री, सितंबर और अक्टूबर में वित्त मंत्री तथा अक्टूबर में गृह मंत्री ने भारत का दौरा किया था। इन पूर्ववर्ती यात्राओं के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह का यह भारत दौरा दोनों देशों के बीच सदियों पुराने आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
वाशिंगटन,। अमेरिका के फ्लोरिडा में हुए भीषण विमान हादसे में दोनों पायलटों ने हादसे से ठीक पहले कॉकपिट में जिंदगी बचाने की कोशिश की। को-पायलट अपने करीबियों को संदेश भेज रही थी, वहीं विमान के अंदर कैप्टन जेफ ग्रेगरी ने ईश्वर से प्रार्थना शुरू कर दी थी।
कुछ ही मिनटों बाद विमान तेजी से नीचे गिरा और सड़क पर आग के गोले में तब्दील हो गया। यह निजी विमान रविवार को फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में सड़क पर गिरा था। घटनास्थल के आसपास सैकड़ों घर थे और विमान उनसे कुछ ही मीटर की दूरी पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। हादसे के वीडियो में विमान जमीन से टकराते ही आग लग गई। टक्कर से सड़क पर बड़ा गड्ढा भी हो गया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विमान की 20 साल की को-पायलट हादसे से कुछ देर पहले तक अपने करीबियों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क में थी। उसके सौतेले पिता थियागो कॉर्टेलेटी ने द न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि नतालिया ने दोपहर करीब 12:40 बजे अपने बॉयफ्रेंड को संदेश भेजा था। उन्होंने बताया कि नतालिया ने संदेश में लिखा था, विमान में झटके लग रहे हैं और बर्फ जम रही है। नतालिया को करीब नौ महीने के व्यावसायिक पायलट के अनुभव के दौरान लगभग 1,300 घंटे उड़ान का अनुभव था। वह अक्सर अपने बॉयफ्रेंड के साथ उड़ान भरती थी, जो खुद भी पायलट है।
मौसम बिगड़ने के साथ नतालिया ने विमान को 37 हजार फीट की ऊंचाई तक ले जाने की अनुमति मांगी थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने इसकी मंजूरी दे दी थी। हालांकि, इसके 30 सेकंड से भी कम समय बाद विमान नियंत्रण से बाहर हो गया। दोपहर 12:48 बजे कॉकपिट से आपातकालीन संदेश यानी मेडे कॉल प्रसारित हुई। रेडियो संपर्क टूटने से ठीक पहले नतालिया की आवाज सुनाई दी। उसने कहा- हे गॉड! अब हमारे पास वक्त नहीं बचा है। इसके बाद विमान से कोई संदेश नहीं आया और कुछ ही देर में वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
- आठ से अधिक नकाबपोश बदमाशों ने मचाया उत्पात, वाहनों में तोड़फोड़
- पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही
भुवनेश्वर । ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सोमवार शाम तलवारबाज बदमाशों ने एक बार फिर दहशत फैला दी। लक्ष्मीसागर थाना क्षेत्र के बुधनगर इलाके में आठ से अधिक नकाबपोश युवकों ने जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान निजी अस्पताल के एक कर्मचारी पर तलवार से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। बदमाशों ने इलाके में खड़े वाहनों में भी तोड़फोड़ की।
घायल की पहचान बीजेबी के मैनशिखला बस्ती निवासी रंजन दास के रूप में हुई है, जो एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने रंजन पर बेरहमी से हमला किया। उनके सिर और गर्दन पर चोटें आई हैं। अस्पताल के सहकर्मियों ने किसी तरह उन्हें हमलावरों के चंगुल से बचाया और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।
इस दौरान एक अन्य युवक पर भी तलवार से हमला किए जाने की सूचना है। घटना की सूचना मिलने के बाद लक्ष्मीसागर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके जरिए आरोपियों की पहचान करने और उनके आने-जाने के रास्तों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि 1 सितंबर 2026 को भी बरमुंडा इलाके में देर रात करीब 11:30 बजे दवा खरीदकर लौट रहे दो युवकों पर हमला हुआ था। रास्ते में बाइक से सड़क रोक रहे दो युवकों को पीछे छोड़कर आगे निकलने पर बदमाशों ने उनका पीछा किया। इसके बाद गाली-गलौज करते हुए अचानक तलवार से हमला कर दिया था। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से शहर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
फ्लिपकार्ट, पीएफसी, आरईसी व इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी की बड़ी उधारी की मांग
मुंबई । भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के लिए दाखिल आवेदनों की कुल राशि अगस्त में मासिक आधार पर 5.6 प्रतिशत बढ़कर 8.13 अरब डॉलर तक पहुंच गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है, जो वैश्विक पूंजी तक कंपनियों की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है। जुलाई में यह आंकड़ा 7.69 अरब डॉलर था। अगस्त में दाखिल आवेदनों में कई प्रमुख कंपनियों की बड़ी उधारी मांग शामिल थी।
इनमें फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने तीन साल के लिए 1.14 अरब डॉलर का कर्ज आगे ऋण देने के लिए मांगा, जबकि पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए चार साल नौ महीने की अवधि के लिए 77.5 करोड़ डॉलर का आवेदन दिया। इसी तरह, आरईसी और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने भी क्रमशः सामान्य कारोबारी जरूरतों और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए 50-50 करोड़ डॉलर की उधारी के इरादे दाखिल किए।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आरबीआई ने विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और देश की बाह्य स्थिति मजबूत करने के लिए जून में विशेष एफसीएनआर(बी) जैसी सुविधाएं शुरू की थीं। हालांकि, मजबूत प्रतिक्रिया के कारण एफसीएनआर(बी) सुविधा 31 अगस्त को समय से पहले बंद कर दी गई थी, लेकिन ईसीबी और विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉन्ड सुविधा 31 दिसंबर तक खुली है, जिससे आगे भी पूंजी प्रवाह की उम्मीद है।
फ्लिपकार्ट, पीएफसी, आरईसी व इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी की बड़ी उधारी की मांग
मुंबई । भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के लिए दाखिल आवेदनों की कुल राशि अगस्त में मासिक आधार पर 5.6 प्रतिशत बढ़कर 8.13 अरब डॉलर तक पहुंच गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है, जो वैश्विक पूंजी तक कंपनियों की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है। जुलाई में यह आंकड़ा 7.69 अरब डॉलर था। अगस्त में दाखिल आवेदनों में कई प्रमुख कंपनियों की बड़ी उधारी मांग शामिल थी।
इनमें फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने तीन साल के लिए 1.14 अरब डॉलर का कर्ज आगे ऋण देने के लिए मांगा, जबकि पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए चार साल नौ महीने की अवधि के लिए 77.5 करोड़ डॉलर का आवेदन दिया। इसी तरह, आरईसी और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने भी क्रमशः सामान्य कारोबारी जरूरतों और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए 50-50 करोड़ डॉलर की उधारी के इरादे दाखिल किए।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आरबीआई ने विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और देश की बाह्य स्थिति मजबूत करने के लिए जून में विशेष एफसीएनआर(बी) जैसी सुविधाएं शुरू की थीं। हालांकि, मजबूत प्रतिक्रिया के कारण एफसीएनआर(बी) सुविधा 31 अगस्त को समय से पहले बंद कर दी गई थी, लेकिन ईसीबी और विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉन्ड सुविधा 31 दिसंबर तक खुली है, जिससे आगे भी पूंजी प्रवाह की उम्मीद है।
फ्लिपकार्ट, पीएफसी, आरईसी व इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी की बड़ी उधारी की मांग
मुंबई । भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के लिए दाखिल आवेदनों की कुल राशि अगस्त में मासिक आधार पर 5.6 प्रतिशत बढ़कर 8.13 अरब डॉलर तक पहुंच गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है, जो वैश्विक पूंजी तक कंपनियों की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है। जुलाई में यह आंकड़ा 7.69 अरब डॉलर था। अगस्त में दाखिल आवेदनों में कई प्रमुख कंपनियों की बड़ी उधारी मांग शामिल थी।
इनमें फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने तीन साल के लिए 1.14 अरब डॉलर का कर्ज आगे ऋण देने के लिए मांगा, जबकि पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए चार साल नौ महीने की अवधि के लिए 77.5 करोड़ डॉलर का आवेदन दिया। इसी तरह, आरईसी और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने भी क्रमशः सामान्य कारोबारी जरूरतों और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए 50-50 करोड़ डॉलर की उधारी के इरादे दाखिल किए।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आरबीआई ने विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और देश की बाह्य स्थिति मजबूत करने के लिए जून में विशेष एफसीएनआर(बी) जैसी सुविधाएं शुरू की थीं। हालांकि, मजबूत प्रतिक्रिया के कारण एफसीएनआर(बी) सुविधा 31 अगस्त को समय से पहले बंद कर दी गई थी, लेकिन ईसीबी और विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉन्ड सुविधा 31 दिसंबर तक खुली है, जिससे आगे भी पूंजी प्रवाह की उम्मीद है।
फ्लिपकार्ट, पीएफसी, आरईसी व इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी की बड़ी उधारी की मांग
मुंबई । भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के लिए दाखिल आवेदनों की कुल राशि अगस्त में मासिक आधार पर 5.6 प्रतिशत बढ़कर 8.13 अरब डॉलर तक पहुंच गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है, जो वैश्विक पूंजी तक कंपनियों की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है। जुलाई में यह आंकड़ा 7.69 अरब डॉलर था। अगस्त में दाखिल आवेदनों में कई प्रमुख कंपनियों की बड़ी उधारी मांग शामिल थी।
इनमें फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने तीन साल के लिए 1.14 अरब डॉलर का कर्ज आगे ऋण देने के लिए मांगा, जबकि पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए चार साल नौ महीने की अवधि के लिए 77.5 करोड़ डॉलर का आवेदन दिया। इसी तरह, आरईसी और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने भी क्रमशः सामान्य कारोबारी जरूरतों और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए 50-50 करोड़ डॉलर की उधारी के इरादे दाखिल किए।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आरबीआई ने विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और देश की बाह्य स्थिति मजबूत करने के लिए जून में विशेष एफसीएनआर(बी) जैसी सुविधाएं शुरू की थीं। हालांकि, मजबूत प्रतिक्रिया के कारण एफसीएनआर(बी) सुविधा 31 अगस्त को समय से पहले बंद कर दी गई थी, लेकिन ईसीबी और विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉन्ड सुविधा 31 दिसंबर तक खुली है, जिससे आगे भी पूंजी प्रवाह की उम्मीद है।
फ्लिपकार्ट, पीएफसी, आरईसी व इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी की बड़ी उधारी की मांग
मुंबई । भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के लिए दाखिल आवेदनों की कुल राशि अगस्त में मासिक आधार पर 5.6 प्रतिशत बढ़कर 8.13 अरब डॉलर तक पहुंच गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है, जो वैश्विक पूंजी तक कंपनियों की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है। जुलाई में यह आंकड़ा 7.69 अरब डॉलर था। अगस्त में दाखिल आवेदनों में कई प्रमुख कंपनियों की बड़ी उधारी मांग शामिल थी।
इनमें फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने तीन साल के लिए 1.14 अरब डॉलर का कर्ज आगे ऋण देने के लिए मांगा, जबकि पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए चार साल नौ महीने की अवधि के लिए 77.5 करोड़ डॉलर का आवेदन दिया। इसी तरह, आरईसी और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने भी क्रमशः सामान्य कारोबारी जरूरतों और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए 50-50 करोड़ डॉलर की उधारी के इरादे दाखिल किए।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आरबीआई ने विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और देश की बाह्य स्थिति मजबूत करने के लिए जून में विशेष एफसीएनआर(बी) जैसी सुविधाएं शुरू की थीं। हालांकि, मजबूत प्रतिक्रिया के कारण एफसीएनआर(बी) सुविधा 31 अगस्त को समय से पहले बंद कर दी गई थी, लेकिन ईसीबी और विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉन्ड सुविधा 31 दिसंबर तक खुली है, जिससे आगे भी पूंजी प्रवाह की उम्मीद है।