मुंबई । भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित जल्द ही टीवी के लोकप्रिय क्विज शो कोण होणार करोडपती के मराठी संस्करण को होस्ट करती नजर आएंगी। माधुरी लगभग दो दशकों से भी अधिक समय के अंतराल के बाद टीवी होस्टिंग की दुनिया में वापसी कर रही हैं। यह शो, जो भारत के सबसे लोकप्रिय क्विज कार्यक्रमों में से एक कौन बनेगा करोड़पति के मराठी संस्करण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
इससे पहले उन्होंने कहीं ना कहीं कोई है नामक एक टीवी शो होस्ट किया था, जिसके बाद उन्होंने फिल्मों और अन्य प्रोजेक्ट्स पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। इस वापसी को लेकर माधुरी बेहद उत्साहित हैं, और उन्होंने बताया कि उन्हें इस प्रोजेक्ट की तरफ सबसे ज्यादा कंटेस्टेंट्स की प्रेरक कहानियों और उनके बड़े सपनों ने आकर्षित किया है। शो में शामिल होने की अपनी प्रेरणा बताते हुए माधुरी दीक्षित ने कहा, कोण होणार करोडपती केवल सवालों के जवाब देकर पैसे जीतने वाला शो नहीं है, बल्कि यह मानवीय भावनाओं, अटूट आत्मविश्वास और बड़े सपनों की उड़ान का प्रतीक है।
उन्होंने आगे कहा, मुझे सबसे ज्यादा उत्साह इस बात का है कि मैं इस मंच के माध्यम से कंटेस्टेंट्स की निजी कहानियों और उनके गहरे सपनों के साथ जुड़ पाऊंगी। लोगों के जीवन के अनुभवों को जानना और उनके आकांक्षाओं को समझना ही मुझे इस शो का अभिन्न हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करता है। माधुरी ने अभिनय और होस्टिंग के बीच के मूलभूत अंतर के बारे में भी विस्तार से बात की।
उन्होंने समझाया, जहां एक अभिनेता को कैमरे के समक्ष एक पूर्वनिर्धारित चरित्र में ढलना पड़ता है, वहीं एक होस्ट को अपनी स्वाभाविक पहचान और व्यक्तित्व के साथ प्रस्तुत होने का अवसर मिलता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस शो में दर्शक उनके व्यक्तित्व का एक स्वाभाविक और सहज पक्ष देखेंगे। मैं कंटेस्टेंट्स के सामने बैठकर उनकी जिंदगी के बारे में खुलकर बात करूंगी और उनकी अनसुनी कहानियों को धैर्यपूर्वक सुनूंगी, उन्होंने कहा।
कोण होणार करोडपती के मराठी संस्करण को माधुरी से पहले सचिन खेडेकर, स्वप्निल जोशी और नागराज मंजुले जैसे प्रसिद्ध कलाकारों ने होस्ट किया है, और अब माधुरी इस लीग में शामिल हो रही हैं। शो के मेकर्स ने इसी महीने कोण होणार करोडपती का पहला प्रोमो भी जारी किया था। पारंपरिक महाराष्ट्रीयन परिधानों में सजी माधुरी का यह अवतार, जिसमें उनकी सहजता और गरिमा झलक रही थी, दर्शकों के बीच तुरंत लोकप्रिय हो गया और इसने काफी ध्यान आकर्षित किया।

प्रोमो सामने आने के बाद से ही शो को लेकर दर्शकों और मीडिया के बीच चर्चा तेज हो गई है, जिससे इसकी प्रतीक्षा और बढ़ गई है। माधुरी के इस नए सफर की जानकारी आईएएनएस को देते हुए मेकर्स ने बताया था कि उन्हें कौन बनेगा करोड़पति के मराठी संस्करण को होस्ट करने के लिए चुना गया है। उन्होंने शो के प्रोमो की शूटिंग भी पूरी कर ली है।
यह भी बताया गया कि इस शो का प्रीमियर, महानायक अमिताभ बच्चन द्वारा होस्ट किए जाने वाले हिंदी कौन बनेगा करोड़पति के उद्घाटन एपिसोड के साथ जोड़ने की योजना थी, जो दोनों संस्करणों के बीच एक भावनात्मक सेतु का निर्माण करेगा। बता दें कि हिंदी सिनेमा की प्रतिष्ठित अदाकारा माधुरी दीक्षित, जिन्हें धक-धक गर्ल के नाम से भी जाना जाता है, अब एक नई भूमिका में दर्शकों का दिल जीतने के लिए तैयार हैं।
दुबई । भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने एशिया कप के पहले ही मैच में एक बड़ा रिकार्ड अपने नाम किया है। मंधाना पहले मैच में थाईलैंड के खिलाफ 19 रन ही बना पायीं पर इसी दौरान वह अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ियों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गयीं।
मंधाना ने इसी के साथ ही न्यूजीलैंड की सूजी बेट्स को पीछे छोड़ दिया। उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए केवल 4 रनों की जरुरत थी। अब उनके नाम अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 10,756 रन दर्ज हो गए हैं।
इस रिकार्ड के साथ ही मंधाना अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली दूसरी खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले न्यूजीलैंड की दिग्गज खिलाड़ी सूजी बेट्स 10,740 रनों के साथ दूसरे स्थान पर थीं।
दिलचस्प बात यह है कि इस सूची के शीर्ष दो स्थान अब भारतीय खिलाड़ियों के नाम हैं। सबसे ज्यादा रनों का रिकॉर्ड भारत की पूर्व कप्तान मिताली राज के नाम है, जिन्होंने अपने करियर में 10,868 रन बनाए थे। स्मृति मंधाना को मिताली का रिकॉर्ड तोड़ने और नंबर एक पर पहुंचने के लिए अब केवल 113 रनों की और जरुरत है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने वाली शीर्ष पाँच बल्लेबाज इस प्रकार हैं: 10,868 रन के साथ मिताली राज (भारत), 10,756 रन के साथ स्मृति मंधाना (भारत), 10,740 रन के साथ सूजी बेट्स (न्यूजीलैंड), 10,273 रन के साथ शार्लेट एडवर्ड्स (इंग्लैंड) और 10,007 रन के साथ स्टेफनी टेलर (वेस्टइंडीज)।
मंधाना ने अब तक अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 301 मैच खेले हैं और कुल 10,756 रन बनाए हैं। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में भी वह संयुक्त रूप से पहले स्थान पर हैं। उनके नाम 17 शतक दर्ज हैं, जो ऑस्ट्रेलिया की मेग लैनिंग और दक्षिण अफ्रीका की लौरा वुल्वार्ट के बराबर हैं।
भारतीय सलामी बल्लेबाज ने 9 टेस्ट मैचों में 788 रन, 120 वनडे मैचों में 5411 रन और 172 टी20 मैचों में 4557 रन बनाए हैं। उनके नाम 75 अर्धशतक भी दर्ज हैं, जो उनकी निरंतरता और हर प्रारूप में प्रदर्शन करने की क्षमता को दर्शाता है।
जबलपुर,। कॉलेजों में जनभागीदारी समिति के माध्यम से भर्ती किए गए कर्मचारियों को लेकर दिए गए सिंगल बेंच के आदेश से राज्य सरकार को राहत मिली है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील स्वीकार करते हुए 16 अक्टूबर 2025 को सिंगल बेंच द्वारा पारित आदेश को खारिज कर दिया।
मामले में यह महत्वपूर्ण सवाल सामने आया था कि जनभागीदारी समिति के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों से जुड़ा अतिरिक्त वित्तीय दायित्व कॉलेजों पर डालने का असर उनके सीमित संसाधनों और शिक्षा व्यवस्था पर कितना पड़ेगा।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि कॉलेजों को पहले से ही उपलब्ध संसाधनों के भीतर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं संचालित करनी पड़ती हैं। ऐसे में जनभागीदारी समिति से भर्ती कर्मचारियों के संबंध में अतिरिक्त वित्तीय भार डालने से कॉलेजों के संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील मंजूर कर ली। इसके साथ ही सिंगल बेंच का 16 अक्टूबर 2025 का आदेश निरस्त हो गया। हाईकोर्ट के इस फैसले से जनभागीदारी समिति के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय दायित्व के मामले में स्थिति महत्वपूर्ण रूप से बदल गई है।
भोपाल । अगले साल से गांवों में रहने वाले लोगों को अपनी संपत्ति पर कर देना पड़ सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्रों में पक्के मकानों और अन्य संपत्तियों का आकलन कर संपत्ति कर लगाया जाएगा। पक्के मकानों पर न्यूनतम ₹1000 सालाना संपत्ति कर निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव तैयार है। इसके साथ ही ग्रामीणों को पानी की सुविधा के लिए जलकर भी देना होगा।
सरकार का तर्क है, ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के रखरखाव के लिए स्थानीय राजस्व को बढ़ाना जरूरी है। हालांकि, इस व्यवस्था का ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक असर भी पड़ेगा।
प्रस्ताव में आदिवासी ब्लॉकों को संपत्ति कर में छूट देने के प्रावधान पर विचार किया जा रहा है।
इससे आदिवासी बहुल क्षेत्रों के ग्रामीणों को राहत मिलेगी। नई कर व्यवस्था लागू होने से पहले संपत्तियों का सर्वे और मूल्यांकन शुरू किया जाएगा. ग्राम पंचायतों को कर निर्धारण और वसूली की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
भोपाल । अगले साल से गांवों में रहने वाले लोगों को अपनी संपत्ति पर कर देना पड़ सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्रों में पक्के मकानों और अन्य संपत्तियों का आकलन कर संपत्ति कर लगाया जाएगा। पक्के मकानों पर न्यूनतम ₹1000 सालाना संपत्ति कर निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव तैयार है। इसके साथ ही ग्रामीणों को पानी की सुविधा के लिए जलकर भी देना होगा।
सरकार का तर्क है, ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के रखरखाव के लिए स्थानीय राजस्व को बढ़ाना जरूरी है। हालांकि, इस व्यवस्था का ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक असर भी पड़ेगा।
प्रस्ताव में आदिवासी ब्लॉकों को संपत्ति कर में छूट देने के प्रावधान पर विचार किया जा रहा है।
इससे आदिवासी बहुल क्षेत्रों के ग्रामीणों को राहत मिलेगी। नई कर व्यवस्था लागू होने से पहले संपत्तियों का सर्वे और मूल्यांकन शुरू किया जाएगा. ग्राम पंचायतों को कर निर्धारण और वसूली की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
भोपाल । अगले साल से गांवों में रहने वाले लोगों को अपनी संपत्ति पर कर देना पड़ सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्रों में पक्के मकानों और अन्य संपत्तियों का आकलन कर संपत्ति कर लगाया जाएगा। पक्के मकानों पर न्यूनतम ₹1000 सालाना संपत्ति कर निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव तैयार है। इसके साथ ही ग्रामीणों को पानी की सुविधा के लिए जलकर भी देना होगा।
सरकार का तर्क है, ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के रखरखाव के लिए स्थानीय राजस्व को बढ़ाना जरूरी है। हालांकि, इस व्यवस्था का ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक असर भी पड़ेगा।
प्रस्ताव में आदिवासी ब्लॉकों को संपत्ति कर में छूट देने के प्रावधान पर विचार किया जा रहा है।
इससे आदिवासी बहुल क्षेत्रों के ग्रामीणों को राहत मिलेगी। नई कर व्यवस्था लागू होने से पहले संपत्तियों का सर्वे और मूल्यांकन शुरू किया जाएगा. ग्राम पंचायतों को कर निर्धारण और वसूली की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
भोपाल । अगले साल से गांवों में रहने वाले लोगों को अपनी संपत्ति पर कर देना पड़ सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्रों में पक्के मकानों और अन्य संपत्तियों का आकलन कर संपत्ति कर लगाया जाएगा। पक्के मकानों पर न्यूनतम ₹1000 सालाना संपत्ति कर निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव तैयार है। इसके साथ ही ग्रामीणों को पानी की सुविधा के लिए जलकर भी देना होगा।
सरकार का तर्क है, ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के रखरखाव के लिए स्थानीय राजस्व को बढ़ाना जरूरी है। हालांकि, इस व्यवस्था का ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक असर भी पड़ेगा।
प्रस्ताव में आदिवासी ब्लॉकों को संपत्ति कर में छूट देने के प्रावधान पर विचार किया जा रहा है।
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भोपाल । अगले साल से गांवों में रहने वाले लोगों को अपनी संपत्ति पर कर देना पड़ सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्रों में पक्के मकानों और अन्य संपत्तियों का आकलन कर संपत्ति कर लगाया जाएगा। पक्के मकानों पर न्यूनतम ₹1000 सालाना संपत्ति कर निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव तैयार है। इसके साथ ही ग्रामीणों को पानी की सुविधा के लिए जलकर भी देना होगा।
सरकार का तर्क है, ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के रखरखाव के लिए स्थानीय राजस्व को बढ़ाना जरूरी है। हालांकि, इस व्यवस्था का ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक असर भी पड़ेगा।
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