नई दिल्ली,। भारत में कोविड महामारी के बाद पहली बार नेशनल हाईवे पर होने वाली मौतों में कमी आई है, जबकि भारत में कुल सड़क दुर्घटनाओं में मौतें बढ़ीं। पिछले हफ्ते लोकसभा में पेश किए गए सरकारी डेटा से पता चलता है कि केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक्सप्रेस समेत एनएच पर होने वाली मौतों में 4.1 फीसदी की गिरावट आई है।
एक्सप्रेसवे एनएव पर होने वाली मौतें 2024 में 64,772 से 4.1फीसदी घटकर 2025 में 62,122 हो गईं। वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से, 20 ने एनएच पर होने वाली मौतों की कमी दर्ज की गई है, लेकिन 15 राज्यों में बढ़ोतरी हुई है। लक्षद्वीप जहां कोई नेशनल हाईवे नहीं है, 2022 से ‘जीरो एनएच मौतें’ दर्ज करने वाला अकेला राज्य था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में पेश किए गए डेटा से पता चलता है कि एनएच मौतों में सबसे ज्यादा गिरावट यूपी में दर्ज की गई, जहां 2024 में 9,560 मौतें हुई थीं, जो 2025 में घटकर 7,573 हो गईं। मध्य प्रदेश में भी कमी दर्ज की गई, जो 4,644 से घटकर 3,610 हो गईं, साथ ही पंजाब में भी इसी दौरान 1,562 से घटकर 1,022 हो गईं। वहीं जिन राज्यों में एनएच मौतों में बढ़ोतरी देखी गई, उनमें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।
पहली पारी में 5 विकेट पर 239 रन बनाये
जमैका। मेजबान वेस्टइंडी ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए अच्छी शुरुआत की है। दिन का खेल समाप्त होने तक मेजबान टीम ने अपननी पहली पारी में 5 विकेट पर 239 रन बनाये। दिन का खेल समाप्त होने के समय जस्टिन ग्रीव्स और कप्तान रोस्टन चेस खेल रहे थे। ग्रीव्स ने 125 गेंदों पर शानदार 64 रन बनाये जबकि कप्तान चेस भी 36 रन बनाकर नाबाद रहे।
वेस्टइंडीज की टीम ने पहले सत्र से ही तेज तर्रार शुरुआत की थी। बारिश से प्रभावित इस सत्र में मेजबान टीम ने लंच तक ही 9.5 ओवर में 1 विकेट के नुकसान पर 49 रन बना लिए थे। इस दौरान ब्रैंडन किंग ने केवल 27 गेंदों में सात चौकों की मदद से 33 रनों की आक्रामक पारी खेली। वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने पाक गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया।
कावेम हॉज और तेगनारायण चंद्रपॉल जैसे सलामी बल्लेबाज भी विफल रहे। हॉज ने 32 गेंद खेलकर 15 रन बनाये जबकि चंद्रपॉल ने केवल 10 रन बनाए। मध्यक्रम में अमीर जंगू ने 29 और शाई होप ने 26 रनों की पारियां खेलकर टीम को उबारा। इन पारियों से वेस्टइंडीज ने एक अच्छा स्कोर बना लिया। दूसरी ओर पाक गेंदबाज संघर्ष करते दिखे। मोहम्मद अली ने सबसे ज्यादा 2 विकेट लिए। उनके अलावा उवैद शाह, अली उस्मान और साजिद खान को भी एक-एक विकेट मिला।
- बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड के बीच बैंकों ने आरबीआई और एनपीसीआई को सुझाया नया सुरक्षा तंत्र
नई दिल्ली। भारत में तेजी से बढ़ते यूपीआई साइबर फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बैंकों ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के सामने यूपीआई पेमेंट के लिए एक नया सुरक्षा मॉडल प्रस्तावित किया है। इस मॉडल के तहत, संदिग्ध या हाई-रिस्क ट्रांजैक्शन पर यूजर्स को हां या नहीं का कंफर्मेशन अलर्ट मिलेगा, जिससे अनजाने में होने वाले धोखे को रोका जा सकेगा।
वर्तमान में, करोड़ों लोग हर दिन यूपीआई के जरिए डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन ठगी, फर्जी कस्टमर केयर कॉल और नकली रिफंड स्कैम जैसे साइबर फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बैंकों ने एक नया सुरक्षा मॉडल सुझाया है। प्रस्तावित सिस्टम के अनुसार, यदि कोई यूपीआई ट्रांजैक्शन संदिग्ध पाया जाता है, तो पेमेंट पूरा होने से पहले ग्राहक की स्क्रीन पर हां/नहीं का अलर्ट दिखाई देगा। हाँ चुनने पर पेमेंट आगे बढ़ेगा, जबकि नहीं दबाने पर ट्रांजैक्शन रद्द हो जाएगा।
यदि यूजर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो पेमेंट तुरंत क्रेडिट होने के बजाय कुछ समय बाद पूरा हो सकता है। यह नया नियम हर पेमेंट पर लागू नहीं होगा, बल्कि केवल उन्हीं ट्रांजैक्शन पर दिखेगा जिनमें असामान्य गतिविधि, जैसे देर रात बड़ा पेमेंट, पहली बार किसी नए व्यक्ति को पैसा भेजना या हाल ही में खुले खाते में ट्रांसफर करना, शामिल हो। बैंकों ने कुछ ट्रांजैक्शन में एक घंटे की देरी वाले आरबीआई के सुझाव पर भी अपनी चिंता जताई है, उनका मानना है कि इससे डिजिटल पेमेंट की गति धीमी हो सकती है।
हालांकि, 10,000 रुपये से अधिक के हर लेनदेन पर अलर्ट दिखाने के बजाय, बैंक केवल संदिग्ध मामलों पर ही इसे लागू करने के पक्ष में हैं। यह पहल ऑथराइज्ड पुश पेमेंट फ्रॉड को रोकने पर केंद्रित है, जहां ग्राहक अनजाने में धोखाधड़ी वाले पेमेंट को मंजूरी दे देते हैं। यह नया अलर्ट सिस्टम ग्राहकों को अंतिम समय पर सोचने और संभावित धोखे से बचने का अवसर देगा। फिलहाल, यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम निर्णय आरबीआई तथा एनपीसीआई द्वारा लिया जाएगा।
चंडीगढ़ । पंजाब के एक उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को एक ग्राहक के खाते से हुए अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन के 1.64 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। ग्राहक ने तुरंत धोखाधड़ी की जानकारी बैंक शाखा, एसबीआई हेल्पलाइन, नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल और पुलिस को दी थी, लेकिन बैंक ने राशि वापस नहीं की।
मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचने पर, कमीशन ने बार-बार अनुरोध के बावजूद मामले को हल न करने को सेवा में कमी माना। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने कभी अपनी कोई गोपनीय जानकारी साझा नहीं की। बैंक ने ग्राहक की लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लेनदेन उसके यूजरनेम, पासवर्ड और ओटीपी के बिना संभव नहीं था।
मगर, आयोग ने पाया कि एसबीआई ग्राहक की लापरवाही साबित करने के लिए कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य (जैसे सर्वर लॉग या फोरेंसिक रिपोर्ट) पेश नहीं कर सका। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए, आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि ग्राहक अनधिकृत लेनदेन की समय पर सूचना देता है, तो ग्राहक की लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होती है।
चंडीगढ़ । पंजाब के एक उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को एक ग्राहक के खाते से हुए अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन के 1.64 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। ग्राहक ने तुरंत धोखाधड़ी की जानकारी बैंक शाखा, एसबीआई हेल्पलाइन, नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल और पुलिस को दी थी, लेकिन बैंक ने राशि वापस नहीं की।
मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचने पर, कमीशन ने बार-बार अनुरोध के बावजूद मामले को हल न करने को सेवा में कमी माना। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने कभी अपनी कोई गोपनीय जानकारी साझा नहीं की। बैंक ने ग्राहक की लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लेनदेन उसके यूजरनेम, पासवर्ड और ओटीपी के बिना संभव नहीं था।
मगर, आयोग ने पाया कि एसबीआई ग्राहक की लापरवाही साबित करने के लिए कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य (जैसे सर्वर लॉग या फोरेंसिक रिपोर्ट) पेश नहीं कर सका। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए, आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि ग्राहक अनधिकृत लेनदेन की समय पर सूचना देता है, तो ग्राहक की लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होती है।
चंडीगढ़ । पंजाब के एक उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को एक ग्राहक के खाते से हुए अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन के 1.64 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। ग्राहक ने तुरंत धोखाधड़ी की जानकारी बैंक शाखा, एसबीआई हेल्पलाइन, नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल और पुलिस को दी थी, लेकिन बैंक ने राशि वापस नहीं की।
मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचने पर, कमीशन ने बार-बार अनुरोध के बावजूद मामले को हल न करने को सेवा में कमी माना। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने कभी अपनी कोई गोपनीय जानकारी साझा नहीं की। बैंक ने ग्राहक की लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लेनदेन उसके यूजरनेम, पासवर्ड और ओटीपी के बिना संभव नहीं था।
मगर, आयोग ने पाया कि एसबीआई ग्राहक की लापरवाही साबित करने के लिए कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य (जैसे सर्वर लॉग या फोरेंसिक रिपोर्ट) पेश नहीं कर सका। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए, आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि ग्राहक अनधिकृत लेनदेन की समय पर सूचना देता है, तो ग्राहक की लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होती है।
चंडीगढ़ । पंजाब के एक उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को एक ग्राहक के खाते से हुए अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन के 1.64 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। ग्राहक ने तुरंत धोखाधड़ी की जानकारी बैंक शाखा, एसबीआई हेल्पलाइन, नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल और पुलिस को दी थी, लेकिन बैंक ने राशि वापस नहीं की।
मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचने पर, कमीशन ने बार-बार अनुरोध के बावजूद मामले को हल न करने को सेवा में कमी माना। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने कभी अपनी कोई गोपनीय जानकारी साझा नहीं की। बैंक ने ग्राहक की लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लेनदेन उसके यूजरनेम, पासवर्ड और ओटीपी के बिना संभव नहीं था।
मगर, आयोग ने पाया कि एसबीआई ग्राहक की लापरवाही साबित करने के लिए कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य (जैसे सर्वर लॉग या फोरेंसिक रिपोर्ट) पेश नहीं कर सका। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए, आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि ग्राहक अनधिकृत लेनदेन की समय पर सूचना देता है, तो ग्राहक की लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होती है।
चंडीगढ़ । पंजाब के एक उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को एक ग्राहक के खाते से हुए अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन के 1.64 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। ग्राहक ने तुरंत धोखाधड़ी की जानकारी बैंक शाखा, एसबीआई हेल्पलाइन, नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल और पुलिस को दी थी, लेकिन बैंक ने राशि वापस नहीं की।
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मगर, आयोग ने पाया कि एसबीआई ग्राहक की लापरवाही साबित करने के लिए कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य (जैसे सर्वर लॉग या फोरेंसिक रिपोर्ट) पेश नहीं कर सका। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए, आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि ग्राहक अनधिकृत लेनदेन की समय पर सूचना देता है, तो ग्राहक की लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होती है।