जबलपुर, लक्ष्मीपुर बस्ती के 250 परिवारों को हटाने के मामले में फैसला सुरक्षित

Oct 28, 2026

 रहवासियों ने हाई कोर्ट में रखा पक्ष, पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी किए बिना बेदखली पर जताई आपत्ति

जबलपुर, । मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने जबलपुर के एमआर-फोर रोड से लगी लक्ष्मीपुर बस्ती में रह रहे लगभग 200 से 250 परिवारों को हटाने के मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया है। एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान जबलपुर नगर निगम, जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए), केसरवानी शिक्षा समिति और बस्ती के रहवासियों का पक्ष प्रस्तुत किया गया।

बस्ती के रहवासियों की ओर से हस्तक्षेपकर्ता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर और अधिवक्ता रवींद्र कुमार गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि लक्ष्मीपुर की लगभग आठ हेक्टेयर भूमि का वर्ष 1990 में अधिग्रहण किया गया था। क्षेत्र में पहले से रह रहे कई परिवारों को वर्ष 1998 में नगरीय क्षेत्र के भूमिहीन अधिनियम के तहत 28 वर्ष की पट्टेदारी दी गई थी।

अधिवक्ताओं ने एकलपीठ के समक्ष दलील दी कि उक्त बस्ती में पट्टाधारी परिवारों सहित लगभग 200 से 250 परिवार निवास कर रहे हैं। उन्हें बिना उचित सुनवाई, पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी किए हटाना उचित नहीं होगा। न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि क्षेत्र में वर्षों के दौरान सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं विकसित हुई हैं।

रहवासियों की ओर से पूर्व में बस्ती खाली कराने के लिए बिजली काटने और अतिक्रमण हटाने की तैयारी किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने प्रकरण में आदेश सुरक्षित कर लिया।



Subscribe to our Newsletter