भारतीय रेलवे पर अमृत भारत स्टेशन योजना में 157 आकांक्षी जिले (Aspirational District) के स्टेशनो को किया जा रहा है पुनर्विकसित

Dec 05, 2024

पश्चिम मध्य रेलवे के 11 आकांक्षी जिले स्टेशनों को किया जा रहा है विकसित

भोपाल, 04 दिसम्बर। रेल मंत्रालय ने भारतीय रेलवे पर रेलवे स्टेशनों के विकास के लिए ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ शुरू की है। इस योजना में दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निरंतर आधार पर स्टेशनों के विकास की परिकल्पना की गई है। इसमें प्रत्येक स्टेशन पर आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान तैयार करना और चरणों में उनका क्रियान्वयन करना शामिल है, ताकि स्टेशनों पर सुविधाओं में सुधार हो, जैसे स्टेशन तक पहुंच में सुधार, परिभ्रमण क्षेत्र, प्रतीक्षालय, शौचालय, आवश्यकतानुसार लिफ्ट/एस्केलेटर, प्लेटफॉर्म की सतह और प्लेटफॉर्म को ढंकना, साफ-सफाई, मुफ्त वाई-फाई, ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों के लिए कियोस्क, बेहतर यात्री सूचना प्रणाली, कार्यकारी लाउंज, व्यावसायिक बैठकों के लिए नामित स्थान, भूनिर्माण आदि । इस योजना में भवन में सुधार, स्टेशन को शहर के दोनों ओर एकीकृत करना, मल्टीमॉडल एकीकरण, दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल समाधान, आवश्यकतानुसार गिट्टी रहित ट्रैक आदि का प्रावधान, चरणबद्ध और व्यवहार्यता और दीर्घावधि में स्टेशन पर सिटी सेंटर का निर्माण शामिल है। 

                  अब तक भारतीय रेलवे पर इस योजना के तहत 1337 स्टेशनों की पहचान की गई है, जिनमें आकांक्षी जिलों में पड़ने वाले 157 स्टेशन शामिल हैं। इसमें पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले आकांक्षी जिलों के रेलवे स्टेशनों की संख्या 11 है जो कि बारां, बरगवां, बियावरा राजगढ़, छबड़ा गुगोर, दमोह, गंजबासौदा, गुना, हिंडौन सिटी, रुठियाई एवं श्री महावीरजी रेलवे स्टेशन शामिल हैं। 

               इसके अलावा, भारतीय रेलवे पर स्टेशनों का उन्नयन/विकास/पुनर्विकास एक सतत और चालू प्रक्रिया है और इस संबंध में कार्य आवश्यकता के अनुसार, परस्पर प्राथमिकता और धन की उपलब्धता के अधीन किए जाते हैं। तथापि, स्टेशनों के उन्नयन/विकास/पुनर्विकास के लिए कार्यों की स्वीकृति और निष्पादन के समय निम्न श्रेणी के स्टेशनों की तुलना में उच्च श्रेणी के स्टेशनों को प्राथमिकता दी जाती है। रेलवे परियोजनाओं का सर्वेक्षण/स्वीकृत/निष्पादन क्षेत्रीय रेलवे के आधार पर किया जाता है, न कि राज्य के आधार पर, क्योंकि रेलवे की परियोजनाएं राज्य की सीमाओं के पार फैली हो सकती हैं। रेलवे परियोजनाओं को पारिश्रमिक, यातायात अनुमान, अंतिम मील कनेक्टिविटी, छूटे हुए लिंक और वैकल्पिक मार्ग, भीड़भाड़ वाली/संतृप्त लाइनों का विस्तार, राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों, संसद सदस्यों, अन्य जन प्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई मांगों, रेलवे की अपनी परिचालन आवश्यकता, सामाजिक-आर्थिक विचारों आदि के आधार पर स्वीकृत किया जाता है, जो चल रही परियोजनाओं की प्रगति और धन की समग्र उपलब्धता पर निर्भर करता है।

             दिनांक 01.04.2024 तक, भारतीय रेलवे में, 488 रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (187 नई लाइन, 40 गेज परिवर्तन और 261 दोहरीकरण) कुल लंबाई 44,488 किलोमीटर, जिसकी लागत लगभग 7.44 लाख करोड़ रुपये है, योजना/अनुमोदन/निर्माण चरण में हैं, जिनमें से 12,045 किलोमीटर लंबाई चालू हो चुकी है और मार्च, 2024 तक लगभग 2.92 लाख करोड़ रुपये का व्यय हो चुका है।

            यह उत्तर माननीय रेल मंत्री जी ने लोकसभा मे  अमृत भारत योजना एवं रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के संबंध में 04.12.2024 को तारांकित प्रश्न के उत्तर में दिया।


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