केंद्रीय करों में ज्यादा हिस्सा मांगेगा मध्य प्रदेश

Jan 15, 2025

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा आदिवासी और जंगल

भोपाल । केंद्रीय वित्त आयोग के अध्यक्ष और उनके सदस्य 5 मार्च को मध्य प्रदेश आ रहे हैं। केंद्र एवं राज्यों के बीच में वर्ष 2026 से लेकर 2031 के बीच में केंद्रीय सहायता के बारे में नए सिरे से केंद्रीय वित्त आयोग, राज्यों के लिए राशि को आवंटित करने की अनुशंसा करेगा। 

 16 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविंद पनगढ़िया और वित्त आयोग के सदस्य 5 मार्च को भोपाल आएंगे। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सभी विभागों को प्रेजेंटेशन की जिम्मेदारी दी गई है। गरीब, आदिवासी और जंगल मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। इसको आधार बनाकर मध्य प्रदेश सरकार केंद्र से, केंद्रीय करों के रूप में ज्यादा हिस्सा लेने के लिए विभागवार प्रेजेंटेशन तैयार कर रही है। 

 वर्तमान में मध्य प्रदेश को केंद्रीय करों का 41 फ़ीसदी हिस्सा ही मिल रहा है। मध्य प्रदेश सरकार इसको बढाकर 50 फ़ीसदी कराना चाहती है। उल्लेखनीय है, मध्य प्रदेश में आदिवासियों की सबसे बड़ी जनसंख्या है। इसी तरह से मध्य प्रदेश में सबसे बड़े एरिया में जंगल है। रखरखाव और सहायता मे मध्य प्रदेश सरकार को अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ता है। जंगल ज्यादा होने से जंगल की रखरखाव में खर्च मध्य प्रदेश सरकार का बहुत ज्यादा है। इसका फायदा सभी राज्यों को मिलता है। ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश सरकार अन्य राज्यों की तुलना में केंद्र सरकार से केंद्रीय करों के रूप में 41 फ़ीसदी के स्थान पर 50 फ़ीसदी राशि की मांग कर रहा है। 

 पिछले 15 वर्षों में अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश की जनसंख्या तेजी के साथ बढ़ी है। मध्य प्रदेश सरकार ने एक्सपर्ट कंसल्टेंट की सहायता ली है। मध्य प्रदेश सरकार केंद्रीय करों और केंद्रीय योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ मध्यप्रदेश को मिले। इसके लिए सरकारी स्तर पर हर तरह से तैयारी की जा रही है। 


Subscribe to our Newsletter